मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

राह चलते चलते कदमों को एक आवाज नें जकड
लिया था। अंकल 5 रूपये का जूस दे दो। ए चल भाग
यहाँ से।5 रूपये का जूस मांग अपने बाप से। जूस वाले ने
अजीब सी शक्ल बनाते हुए बच्ची को दुत्कारा।
उसकी आंखो के सामने अपना बचपन घूम गया।जब कई
बार उन्हे भी कोई चीज इसी तरह ललचाती थी और
यही दुर्व्यवहार उनके साथ होता था। उसने तुरंत
अपनी गीली आंखो को चश्में से ढंका और जूस वाले
से मुखातिब हुई।एक जूस देना भैया जी।
बच्ची बडी आशा से फिर बोली।अच्छा 5 रूपये
की मौसम्बी दे दो। जूस वाला कुछ कहता उसके पहले
वो बच्ची से बोली- क्या नाम है तुम्हारा ?
बच्ची थोडी सहम कर जाने लगी। लो जूस पियो।
डरो नहीं। उसने बच्ची को ग्लास पकडाया।
भैया जी,बच्चों से ऐसे बात करते हैं क्या ?इसकी जगह
आपकी बेटी होती तब भी ऐसे ही बोलते ?उसने जूस
के पैसे देते हुए कहा और अपनी पीठ पर मुस्कान
भरी आंखो को महसूस करते हुए वो आगे बढ गई।
दोस्तो अगर आपको कोई मिले जिसे आपकी मदद
की जरूरत हो तो तुरन्त मदद के लिये आगे आऐ
क्या पता भगवान ने इस नेक काम के लिये
आपको चुना हो नही तो वो हम सब के लिये
अकेला ही बहुत है!

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