मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

एक महान फोजी कि कहानी जरुर पढे ।

हर जगहचोट थी। पता नहीं चल
रहा था कि खून कहां से निकल रहा है। मांसपेशियां और आंतें बाहर
निकली हुई थीं। शरीर के
ज्यादातर हिस्से में बम के टुकड़े धंसे थे। सबसे ज्यादा पैरों और पेट
में घाव थे। बहादुर जवानों के लिए भी यह
नजारा वीभत्स था। जाहिर सी बात है
कि अगर किसी पर मोर्टार बम फटता है
तो ऐसा ही दृश्य होगा। वह अपनी बटालियन
के साथ लड़ाई कर रहा था, राष्ट्र के सम्मान के लिए।
यह व्यक्ति लगभग मर चुका था। शरीर में
किसी प्रकार की हलचल
नहीं थी। लेकिन उसके
साथी उसे खून में लथपथ नहीं छोड़ सकते
थे। वे उसे तुरंत मेडिकल कैंप ले गए। सबसे बुरा वहां पर हुआ जब
डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डोगरा रेजिमेंट ने
अपना सबसे
बेहतरीन आदमी खो दिया था। मेजर देवेंद्र
पाल सिंह 24 साल की उम्र में मृत घोषित कर दिए गए
थे। वेे 1999 में हुए करगिल युद्ध के दौरान सीमा पर
लड़ रहे थे। पूरे दुख के साथ यह संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।
उनके शरीर को अस्थाई मुर्दाघर में भेजा गया। आंखों में
आंसू लिए जवान अन्य घायल साथियों के पास चले गए। लेकिन मेजर
सिंह ने मरने से इनकार कर दिया। मुर्दाघर में मौजूद एक अन्य
डॉक्टर ने उनके अंदर जीवन देखा। उनके बचने
की उम्मीद बेहद कम थी।
लेकिन डॉक्टर उन्हें तत्काल अस्थाई ऑपरेशन थियेटर में ले गया।
लक्ष्य था मेजर को बचाना। वहां उन्होंने एक लड़ाई और
लड़ी जैसी मेजर ने पाकिस्तान के साथ कुछ
घंटे पहले लड़ी थी। उन्होंने सारे बम के
टुकड़े निकाले। उनकी आंतों के ज्यादातर हिस्से
को काटकर निकाल दिया गया। उनका दाहिना पैर
भी काटना पड़ा। अब वे सेना में सेवा देने लायक
नहीं थे। वे 90 फीसदी विकलांग
हो चुके थे। खुशी इस बात
की थी जिंदगी बच गई। उन्होंने
जिंदगी की दूसरी लड़ाई शुरू
की। कई महीनों तक अस्पताल के चक्कर
लगाते रहे। अब रिटायर्ड मेजर डीपी सिंह
के सामने लड़ाई थी सामान्य
जिंदगी जीने की, वह
भी कटे हुए पैर के साथ। आमतौर पर उनका दिन सुबह
6 बजे शुरू हो जाता है। उसके बाद वे व्यायाम और सुबह
की दौड़ के लिए जाते हैं। तीन घंटे प्रैक्टिस
करने के बाद वे बैंक जाते हैं। जहां वे प्रशासनिक प्रबंधक हैं।
वे मुंबई मैराथन में बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार और
उद्योगपति अनिल अंबानी के साथ दौड़ते हुए और कंधे से
कंधा मिलाकर खड़े हुए देखे जाते हैं। हर बार जब वे फिनिश लाइन पर
पहुंचते हैं उन्हें बेहद खुशी होती है।
क्योंकि यह भी उनके लिए किसी चैलेंज से
कम नहीं होता। वे हर बार दुख और दर्द झेल रहे
लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। निशक्त लोगों के लिए
हमेशा उनके
साथ खड़े रहते हैं। करगिल युद्ध की तरह
ही, जहां वे और उनके साथी लड़ाई
जीते थे वे हर दिन ऐसे ही लोगों का दिल
जीतते हैं। लोग उन्हें आश्चर्य
भरी निगाहों से देखते हैं जब वे सड़क पर दौड़ने निकलते
हैं। अगर किसी व्यक्ति को मेजर सिंह के साथ जोड़
सकते हैं तो वो है दक्षिण अफ्रीकी ब्लेड
रनर ऑस्कर लियोनार्ड कार्ल पिस्टोरियस। बिना पैरों के दौड़ने
वाले
दुनिया के पहले व्यक्ति। पिस्टोरियस पहले विकलांग हैं
जो बिना पैरों के
विश्व ट्रैक मेडल और 100, 200 और 400 मीटर में
वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं।
फंडा यह है कि..
. दिमाग के उपयोग का खेल
ही जिंदगी को जीने का माध्यम
बनता है। आप जिंदगी की हर परिस्थिति में
जीत सकते हैं अगर आप अपने दिमाग को मजबूत रखें।

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